GET EXTRA ₹100 DISCOUNT ON YOUR 1ST ORDER OF ₹5000 OR ABOVE. USE CODE WELCOME100 AT CHECKOUT

Facebook Tweet Google + Pinterest Email WhatsApp
SUKHMAN KA MODHA Book By Kuslender shrivastav(Hindi)
SUKHMAN KA MODHA Book By Kuslender shrivastav(Hindi)
SUKHMAN KA MODHA Book By Kuslender shrivastav(Hindi)
Mouse Hover to open Zoom view

SUKHMAN KA MODHA Book By Kuslender shrivastav(Hindi)

Be the first to Review this product

₹210
₹225
6% OFF, Hurry*

   Shipping Charge 60

₹ 200
Use ₹ 10 WC
Product Price : 210
Wincash Use : - 10
You Pay : 200
Register now and instantly get ₹500 WinCash money. You can use WinCash to get extra discounts while shopping from our website. Not usable with Cash on Delivery payment method, usable only on Prepaid orders. T&C*, for more visit.

  • Age Group : 18 Year
  • Language : Hindi
  • Binding : Hardcover
  • Latest Arrivals : Last 90 Days
  • Author Name : KUSLENDER SRIVASTAV
  • Publisher Name : ANURADHA PRAKASHAN
  • Edition : 1ST edition (2016)
  • Pages : 80 pages

No Returns and Replacement Available for this product

Generally delivered in 5 - 9 days.

Accept all type of payment like: Credit Card , Debit Card , Net Banking , COD

Key Features

  • Age Group : 18 Year
  • Language : Hindi
  • Binding : Hardcover
  • Latest Arrivals : Last 90 Days
  • Author Name : KUSLENDER SRIVASTAV
  • Publisher Name : ANURADHA PRAKASHAN
  • Edition : 1ST edition (2016)
  • Pages : 80 pages

Description

SHORTY HINDI STORIES BY MR. KUSHLENDER SRIVASTAVA IRONY HINDI STORIES कहानियां सीमेन्टी बयार में /ाूल भरी राहों को खोजती है, उसका हर पात्र भटकता हुआ प्रतिबिम्ब है जिसे मातृत्व से प्यार है, जिसे अपनी माटी से स्नेह है जिसे अपने ,काकी हो जाने पर ,तराज नहीं है, शायद समाज के वर्तमान परिवेश से निकले ये पात्र हमारा प्रतिनि/िात्व कर रहे हैं । कल्पनाशीलता से परे जीवंत स्वरूप लेकर वे हमसे प्रश्न कर रहे हैं और हम निरूत्तर हैं, हम नि%शब्द हैं । ,क था राजा, ,क थी राजकुमारी कहानी के दिन लद ग, अब प्रेमचंद का होरी चाहिये, हमारे बीच से निकला कोई गरीब चाहिये जिसकी दास्तां हमारे सूख चुके अश्कों के किसी कोने से अश्रु की ,क बूंद ढूंढ कर गालों पर बिखेर सकें । कंक्रीट के मैदान में संवेदनाओं की नमी खोेजी जा रही है । मैं जानता हूँ कि कंक्रीट में भी नमी होती है जैसे मेरे कहानी संग्रह "नीम वाली भौजी" की कहानी "अनपढ़ माँ" ने पाठकों की आँखों में आँसू लाने का प्रयास किया, मेरे पास फोन आये ,स-,म-,स- आये पाठकों ने कहानी के पात्रों के साथ तारतम्य बिठाया और अपनी वेदना को बह जाने का अवसर दिया ।

Terms & Conditions

The images represent actual product though color of the image and product may slightly differ. No Return & No Refund.
Questions and Answers